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Hindi Lyrics of Sai Sukh Shanti Mantra

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मैंने साईं मुखड़ा देख लिया © Shirdi Sai Baba Life Teachings and Stories
मैंने झुकके माथा टेक दिया

सुबह शुभ मुहर्त लाई है
सांझ को साईं बेला छाई है

मैंने रात को देखा सपना था
कोई खडा सिरहाने अपना था

जब नींद खुली तो कोई नहीं
रात भर ऑंखें सोई नहीं

ख्वाबो में आई परछाई थी
बाबा शिर्डी वाले साई की

मुझको बोले मंदिर आना
मुझे भजन कव्वाली सुनाना

मुझे हुआ ज़रा विश्वास नहीं
सपना था साईं नाथ नहीं

शंका ने मुझको घेर लिया
बुद्धि मन मेरा फेर दिया

सोचा मन को वहम हुआ
साईं मूरत को ज्यों ही छुआ

मूरत में दिख गए साईं जी
परमेश्वर की परछाईं जी

मेरी आँखों से आंसू बहने लगे
मुझे लोग दीवाना कहने लगे

मैंने साईं दर्श को पाया है
मेरे सर पर साईं का साया है

मैं गीत साईं के गाने लगा
हर रोज मंदिर जाने लगा

मैं ध्यान साईं का करता हूँ
मैं ज्ञान से झोली भरता हूँ

मैं काकड़ आरती सुनता हूँ
दिखों से सुख को बुनता हूँ

जब साईं ने स्नान किया
मैंने अमृत रस का पान किया

जब साईं ने पहनी नई चादर
मैंने दुश्मन को भी दिया आदर

जब मुकुट साईं के सर पे सजा
मेरा अंतर मन तब नाच उठा

दोपहर की होती जब आरती
तब ऑंखें साईं को निहारती

संध्या आरती की आई बेला
लगा रे भक्तो का मेला

रात्री बेला में शेजा आरती
निद्रा साईं दासता स्वीकारती

नीम की ठंडी छाया है
सुख चैन जहा समाया है

साईं द्वारकामाई माता है
यहाँ ज्ञान सहज मिल जाता है

चावड़ी माई विधाता है
भक्तों का लगता ताँता है

धुनी में जल गए पाप मेरे
धुँआ बन उड़ गए संताप मेरे

उदी ने रोग मिटा डाले
लगा माथे थोडी खाले

पालकी सबको पालती है
जो गिरे उन्हें सम्भालती है

आकाश में चमका चंदा है
शिरड़ी का चंदा तो नंदा है

साईं का चूल्हा जलता है
पेट सभी का पलता है

साईं के हाथों का सटका
दुश्मनों को जिसने है पटका

साइन समाधि में सोए हैं
भक्तों के संग हँसे रोए है

जो साईं नाम गुण गायेगा
वो परम शांति को पाएगा

जो साईं आरती गायेगा
वो अवगुण दूर भगायेगा

जो साईं आरती उतारेगा
वो अपने भाग सवाँरेगा

जो साईं स्नान करायेंगे
उनके पाप धुल जायेंगे

जो साईं की चादर चढायेंगे
वो दुर्भाग्य दूर भगायेंगे

जो साईं को माला पहनायेंगे
वो दुनियाँ में आदर पायेंगे

जो साईं को इत्र लगायेंगे
वो घर आँगन मह्कायेंगे

जो साईं को दक्षिणा चढायेंगे
वो दरिद्रता दूर भगायेंगे

जो साईं को भोग लगायेंगे
वो सुख भोगते जायेंगे

जो साईं का लंगर लगायेंगे
वो भंडारे भरते जायेंगे

जो साईं का भजन करायेंगे
वो कष्टों से मुक्ति पायेंगे

जो साईं हवन घर में करते
वो पाप ताप श्राप हरते

जो साईं नाम से दान करे
वो झोली में धन-धान भरे

जो साईं लीला सुनाता है
वो भय से मुक्ति पाता है

जो साईं सच्चरित्र को पढ़ते हैं
वो सदा सत्कर्म करते हैं

जो साईं सेवा करते हैं
वो बुरे कर्म से डरते हैं

जो नित साईं मंदिर आएगा
वो सदा शुभ फल पाएगा

जो साईं द्वार पर झुकता है
वो प्राणी ऊँचा उठता है

जो साईं मंदिर बनायेंगे
वो साईं दास हो जायेंगे

जो दुखियों पर उपकार करे
उसे साईं बाबा प्यार करे

जो निंदा से बचते है
वो मीठे फल को चखते है

जो नेक कमाई करते हैं
वो नित एक भलाई करते हैं

पाप कमाई दुःख देती हैं
सुख चैन को छीन लेती हैं

जो साईं सुख शान्ति मंत्र जपे
उसके सब काम साईं सिद्ध करें

कलयुग में साईं अवतारे
भक्तों को भव से उबारे

राजेंद्र सेमवाल वो लिखता
जो साईं कृपा से है दिखता

Written By : Sai Bhakt Rajendra Semwal, Puja Publication, New Delhi

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